मई 2024 में सूर्य से निकले कई प्लाज्मा बादल रास्ते में एक-दूसरे से मिले। उनके असर का एक हिस्सा पृथ्वी पर भू-चुंबकीय तूफान था। सूर्य–पृथ्वी L1 के पास आदित्य-L1 ने इन बादलों के भीतर कणों का बदलाव दर्ज किया। जनवरी 2026 में प्रकाशित अध्ययन ने उन्हीं मापों से बताया कि पीछे से आए आघात ने पहले से मौजूद सौर बादल के भीतर प्रोटॉन और अल्फा कणों को ऊर्जा दी।

दो दिशाओं में माप

यान का Aditya Solar Wind Particle Experiment, यानी ASPEX, सौर हवा के कणों का अध्ययन करता है। उसके SWIS हिस्से में दो विश्लेषक हैं। एक सूर्य–पृथ्वी के कक्षीय तल में और दूसरा उसके लंबवत तल में माप लेता है। इस व्यवस्था से कणों की ऊर्जा के साथ उनकी धारा किस दिशा में बदली, यह भी देखा जा सकता है।

ये विश्लेषक 0.1 से 20 keV ऊर्जा वाले प्रोटॉन और अल्फा कणों के माप पाँच सेकंड के अंतराल पर ले सकते हैं। keV कण-ऊर्जा की इकाई है। ASPEX के दूसरे हिस्से, STEPS, से अधिक ऊर्जावान कणों का स्वतंत्र संकेत मिला। दोनों मापों को साथ पढ़ने से घटना की अधिक पूरी तस्वीर बनी।

12 मई का आघात

विश्लेषण में 12 मई 2024 को 08:47 UTC पर कणों के प्रवाह, वेग और चुंबकीय क्षेत्र में एक साथ बदलाव दिखा। शोधकर्ताओं ने इसे पीछे से आती सामग्री के आघात का पहले वाले बादल में प्रवेश माना। उसके बाद 21:56 UTC तक, लगभग 13 घंटे के क्षेत्र में, कणों का वितरण और तापीय व्यवहार जाँचा गया।

मापों में कण-ऊर्जा का फैलाव बढ़ा और कक्षीय तल से बाहर की दिशा में अधिक प्रवाह दिखा। अध्ययन की व्याख्या है कि आघात की गतिज ऊर्जा का कुछ हिस्सा आयनों की तापीय तथा अधिक ऊर्जावान आबादी में गया।

अंतरिक्ष-मौसम की भौतिकी

बादल के पृथ्वी के पास पहुँचने का समय जानना अंतरिक्ष-मौसम का एक प्रश्न है। उसके भीतर कण किस तरह ऊर्जा पाते हैं, यह दूसरा प्रश्न है। ASPEX का प्रत्यक्ष माप इस अंदरूनी प्रक्रिया पर जानकारी देता है। प्राकृतिक प्लाज्मा में ऐसी अंतःक्रियाओं को समझकर ही कंप्यूटर मॉडल के अनुमान को वास्तविक कण-वितरण से जाँचा जा सकता है।

मुख्य बातें

  • ASPEX के SWIS उपकरण में दो विश्लेषक परस्पर लंबवत तलों में प्रोटॉन और अल्फा कण मापते हैं।
  • 12 मई 2024 को 08:47 UTC पर आघात दर्ज हुआ; अध्ययन में उसके बाद 21:56 UTC तक का लगभग 13 घंटे का क्षेत्र जाँचा गया।
  • यह यान पर सीधे दर्ज कण-माप का विश्लेषण है; इससे सौर बादलों की अंतःक्रिया की भौतिक प्रक्रिया समझने में मदद मिलती है।

स्रोत और संदर्भ

  1. The Astrophysical Journal Letters · Evidence for In Situ Particle Energization during the 2024 May Event Based on the ASPEX Instrument on Board Aditya-L1 ↗7 जनवरी 2026
  2. arXiv · Preprint: Evidence for in situ particle energization during the May-2024 event based on ASPEX ↗15 दिसंबर 2025
  3. ISRO · Aditya-L1’s SUIT and VELC Capture Solar Fury ↗10 जून 2024
  4. Physical Research Laboratory · ASPEX — Scientific Objectives ↗प्रकाशन-तिथि उपलब्ध नहीं

सार्वजनिक प्राथमिक स्रोतों पर आधारित संपादित लेख। स्रोत जाँच: 15 सितंबर 2026।

यह खबर शेयर करें