ग्राम डोंगरगांव की रहने वाली श्रीमती पार्वती बैरागी ने स्व-सहायता समूह से जुड़कर आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाया और आज अपनी आय का मजबूत स्त्रोत तैयार किया है। पार्वती जय बड़ा देव आजीविका स्व-सहायता समूह से 13 मई 2014 को जुड़ीं। समूह के माध्यम से उन्हें ग्रामीण आजीविका मिशन की गतिविधियों से जुड़कर आगे बढ़ने का अवसर मिला।
समूह से जुड़ने से पहले पार्वती का परिवार आर्थिक कठिनाइयों से गुजर रहा था। पैसों के अभाव में जीवन-यापन करना मुश्किल था और गांव में सामाजिक स्थिति भी सम्मानजनक नहीं थी।
समूह से जुड़ने के बाद पार्वती ने बचत एवं समूह से ऋण लेकर अपनी दुकान का विस्तार किया। वर्तमान में वे होटल, किराना, सब्जी एवं अंडे की दुकान संचालित कर रही हैं। इससे उनकी व्यक्तिगत आय लगभग 10 हजार रुपये प्रतिमाह है।
पार्वती ने न केवल स्वयं आर्थिक रूप से मजबूती हासिल की, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं को भी स्व-सहायता समूह से जोड़कर आजीविका गतिविधियों से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने गरीब एवं अति गरीब परिवारों को समूह से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
आज पार्वती की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति में सकारात्मक बदलाव आया है। परिवार में सम्मान बढ़ा है और आर्थिक सुदृढ़ता के कारण बच्चों की शिक्षा के स्तर में भी सुधार हुआ है।
“ समूह से जुड़ने के बाद हमारी आर्थिक स्थिति में बदलाव आया। हमें दूर-दूर तक जाने का अवसर मिला, जिससे हमें बाहर की दुनिया देखने की पहल मिली। पहले हम गांव से बाहर नहीं जाते थे। ”
पार्वती बैरागी की कहानी बताती है कि स्व-सहायता समूह केवल बचत और ऋण का माध्यम नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के आत्मविश्वास, सम्मान और आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बन सकता है।



