अपने काम को आगे बढ़ाने की इच्छा हो और उसके लिए जरूरी पूंजी का अभाव हो, तो कई बार मेहनत के बावजूद व्यक्ति आगे नहीं बढ़ पाता। श्रीमती हेमलता कोरी के सामने भी ऐसी ही स्थिति थी। उन्हें ब्यूटी पार्लर के काम में रुचि थी और वे अपने व्यवसाय को बढ़ाना चाहती थीं, लेकिन पर्याप्त धनराशि उपलब्ध नहीं होने के कारण वे अपनी योजना के अनुसार काम नहीं कर पा रही थीं। परिवार के साथ रहते हुए हेमलता ने अपने हुनर को ही रोजगार का माध्यम बनाया। इसी दौरान उन्हें प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (पीएम स्वनिधि) योजना के बारे में जानकारी मिली।
नगरपालिका परिषद बिजुरी की एन.यू.एल.एम. शाखा से योजना की जानकारी लेने के बाद उन्होंने आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर शहरी कामगार पोर्टल पर अपना पंजीयन कराया। नगरपालिका द्वारा उन्हें प्रमाण-पत्र एवं पहचान-पत्र भी उपलब्ध कराया गया। इसके बाद मध्य प्रदेश ग्रामीण बैंक, शाखा बिजुरी से उन्हें पहली बार 10 हजार रुपये का ऋण मिला।
योजना से मिले 10 हजार रुपये के ऋण का उपयोग उन्होंने अपने ब्यूटी पार्लर के काम को आगे बढ़ाने में किया और 12 माह की अवधि वाले ऋण की किश्तों का समय पर भुगतान किया। इसके बाद बैंक ने उन्हें 20 हजार रुपये का ऋण प्रदान किया, जिसकी 18 माह की किश्तें भी उन्होंने नियमित रूप से जमा कीं। लगातार समय पर ऋण चुकाने के कारण बैंक द्वारा उन्हें आगे 50 हजार रुपये का ऋण स्वीकृत किया गया। 36 माह की अवधि वाले इस ऋण की किश्तों का भुगतान भी वे नियमित रूप से कर रही हैं।
पीएम स्वनिधि योजना से मिले आर्थिक सहयोग ने हेमलता को अपने ब्यूटी पार्लर के काम को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाने का अवसर दिया। आज वे नियमित रूप से ब्यूटी पार्लर का संचालन कर रही हैं और इससे होने वाली आमदनी से परिवार की आर्थिक जरूरतों में सहयोग कर रही हैं।
हेमलता बताती हैं, “ब्यूटी पार्लर का काम करना मुझे पहले से पसंद था, लेकिन पैसे की कमी के कारण इसे अपनी इच्छा के अनुसार आगे नहीं बढ़ा पा रही थी। योजना से ऋण मिला तो काम में पैसा लगा सकी। समय पर किश्त जमा करने से आगे भी ऋण मिलता गया। अब मेरा आत्मविश्वास बढ़ा है और मैं अपने काम को और आगे बढ़ाना चाहती हूं।”
श्रीमती हेमलता कोरी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहती हैं कि पीएम स्वनिधि योजना से उन्हें अपने छोटे व्यवसाय को आगे बढ़ाने का अवसर मिला। वे बताती हैं कि योजना के माध्यम से मिले सहयोग से उन्हें न केवल आर्थिक मदद मिली, बल्कि अपने काम को लेकर आत्मविश्वास भी बढ़ा है। 10 हजार रुपये से शुरू हुआ ऋण का सफर 20 हजार और फिर 50 हजार रुपये तक पहुंचा। हेमलता की कहानी बताती है कि समय पर मिलने वाला आर्थिक सहयोग और नियमित मेहनत छोटे व्यवसाय को परिवार की आर्थिक मजबूती का आधार बना सकती है।




