सिवनी जम्बो सीताफल’ को मिलेगी खेत से लेकर निर्यात बाजार तक पहचान सिवनी जम्बो सीताफल को उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण, पैकेजिंग, भंडारण, विपणन और निर्यात तक एक सशक्त मूल्य श्रृंखला से जोड़ने के उद्देश्य से बुधवार को जिला मुख्यालय में जिला स्तरीय सीताफल कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया। जिला प्रशासन एवं उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग द्वारा ‘सीताफल से समृद्धि’ अभियान के अंतर्गत आयोजित कार्यशाला में जिले के विभिन्न विकासखंडों से बड़ी संख्या में सीताफल उत्पादक किसान, कृषक उत्पादक संगठन, स्व-सहायता समूह, उद्यमी एवं अन्य संबंधितजनों ने सहभागिता की।
कार्यशाला में विधायक श्री दिनेश राय, जनपद अध्यक्ष छपारा श्री सदम सिंह वरकड़े, उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण आयुक्त श्री सौरभ सुमन, कलेक्टर श्रीमती नेहा मीना, वनमंडलाधिकारी श्री महेन्द्र सिंह उईके तथा मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम के कार्यकारी संचालक श्री अनिल कुमार राठौर सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, विशेषज्ञ एवं सीताफल क्षेत्र से जुड़े अनुभवी लोग उपस्थित रहे।
सीताफल को केवल फल नहीं, परियोजना के रूप में आगे बढ़ाएं- आयुक्त श्री सुमन
उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण आयुक्त श्री सौरभ सुमन ने कहा कि सिवनी जिले में सीताफल के क्षेत्र में कार्य करने की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि सीताफल को केवल उद्यानिकी फसल के रूप में देखने के बजाय इसे एक समग्र परियोजना के रूप में आगे बढ़ाने की आवश्यकता है, जिसमें उत्पादन के साथ प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, पैकेजिंग, भंडारण और बाजार तक पहुंच को भी शामिल किया जाए।
उन्होंने किसानों को संगठित होकर कृषक उत्पादक संगठन, कंपनी, सहकारी समिति एवं स्व-सहायता समूहों के माध्यम से कार्य करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि शासन-प्रशासन के साथ किसानों की सक्रिय भागीदारी से सीताफल को उद्योगों से जोड़ा जा सकता है और इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं आय के नए अवसर भी विकसित होंगे।
आयुक्त श्री सुमन ने किसानों को सीताफल के क्षेत्र में अच्छा कार्य कर रहे संस्थानों का भ्रमण एवं प्रशिक्षण दिलाने की पहल पर भी जोर दिया। उन्होंने अमरावती सहित अन्य स्थानों पर सीताफल के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों का किसानों को अवलोकन कराने के निर्देश दिए। साथ ही कौशल विकास विभाग के माध्यम से गांवों के युवाओं को सीताफल से जुड़े प्रतिष्ठानों में प्रशिक्षण एवं कार्य-अनुभव दिलाकर स्थानीय स्तर पर दक्ष मानव संसाधन तैयार करने की बात कही।
उन्होंने गांव-गांव में सीताफल के लिए प्रशिक्षित मार्गदर्शक तैयार करने, शीत भंडारण की संभावनाओं को विकसित करने तथा शीत भंडारण को आर्थिक रूप से उपयोगी बनाने के लिए सीताफल के साथ अन्य उत्पादों को भी शामिल करने पर जोर दिया।
सीताफल उत्पादक किसानों को उत्पादन, प्रसंस्करण, बाजार तक पहुंच के साथ ही निर्यात प्रक्रिया में भी हर स्तर पर मिलेगा सहयोग- कलेक्टर श्रीमती मीना
कलेक्टर श्रीमती नेहा मीना ने कहा कि जीआई टैग प्राप्त सिवनी जम्बो सीताफल जिले की विशिष्ट पहचान है और इसके माध्यम से किसानों की आय के नए अवसर विकसित किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन का प्रयास है कि सीताफल उत्पादक किसान केवल उत्पादन करने और स्थानीय बाजार में उपज बेचने तक सीमित न रहें, बल्कि उन्हें खेत से लेकर बेहतर बाजार तक पूरी प्रक्रिया में आवश्यक सहयोग और मार्गदर्शन मिले। सिवनी जम्बो सीताफल को जीआई पहचान मिलने के बाद इसकी विशिष्ट क्षेत्रीय पहचान और बाजार संभावनाओं को लेकर नई संभावनाएं सामने आई हैं।
कलेक्टर श्रीमती मीना ने कहा कि सीताफल के निर्यात की संभावनाओं को देखते हुए किसानों की सीधे बाजार तक पहुंच और हर स्तर पर सहयोग पर जिला प्रशासन द्वारा विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिले के सीताफल उत्पादक किसानों की उपज को निर्यात के लिए आवश्यक अनुज्ञप्ति, पंजीयन एवं अन्य औपचारिकताओं की जानकारी तथा प्रक्रिया में सहयोग एवं ग्राम स्तर तक आवश्यक सुविधा और मार्गदर्शन उपलब्ध कराए जाने का जिला प्रशासन का लक्ष्य है। ताकि किसान अपनी उपज को बड़े बाजारों और संभावित अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने के लिए सक्षम हो सकें।
उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन की कार्ययोजना केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगी। किसानों को उत्पादन, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, पैकेजिंग, भंडारण, बाजार से जुड़ाव और निर्यात के प्रत्येक चरण में आवश्यक जानकारी एवं सहयोग उपलब्ध कराने पर कार्य किया जाएगा। इससे किसान अपनी उपज का बेहतर उपयोग कर सकेंगे और बाजार की मांग के अनुरूप उत्पाद तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ सकेंगे।
कलेक्टर श्रीमती मीना ने कहा कि कार्यशाला में किसानों द्वारा साझा किए गए व्यावहारिक अनुभव एवं सुझावों को भी आगे की कार्ययोजना में शामिल किया जाएगा। संबंधित विभागों, किसानों, कृषक उत्पादक संगठनों, स्व-सहायता समूहों, उद्यमियों एवं निवेशकों के समन्वय से ऐसी व्यवस्था विकसित करने का प्रयास रहेगा, जिसमें किसान की उपज, किसान की मेहनत और किसान को मिलने वाला मूल्य केंद्र में रहे। विभागीय मंशा के अनुरूप आवश्यक प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और बाजार से जोड़ने की सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए कार्य किया जाएगा।
विशेषज्ञों और अनुभवी लोगों ने साझा किए व्यावहारिक अनुभव
महाराष्ट्र सीताफल महासंघ के अध्यक्ष श्री श्याम गटानी ने सीताफल के क्षेत्र में महासंघ द्वारा बड़े स्तर पर किए जा रहे कार्यों और अपने दीर्घ अनुभव को किसानों के साथ साझा किया। उन्होंने सीताफल के उत्पादन, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और विपणन से जुड़ी गतिविधियों की जानकारी देते हुए बताया कि उत्पाद को खेत से बाजार तक पहुंचाने के लिए किस प्रकार संगठित प्रयास किए जा सकते हैं। बड़े स्तर पर सीताफल क्षेत्र में कार्य करने के अनुभवों के माध्यम से उन्होंने किसानों को बाजार की मांग, प्रसंस्करण की संभावनाओं और उत्पाद के बेहतर विपणन से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं से अवगत कराया।
प्रगतिशील किसान श्री विनय बोथरा ने सीताफल उत्पादन से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने उत्पादन एवं बाजार से संबंधित व्यावहारिक जानकारी किसानों को दी तथा किसानों द्वारा पूछे गए विभिन्न प्रश्नों और जिज्ञासाओं का समाधान किया।
भारतीय पैकेजिंग संस्थान, मुंबई के श्री वसीम सिद्दीकी ने सीताफल की बेहतर पैकेजिंग के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि उत्पाद को सुरक्षित और आकर्षक रूप से बाजार तक पहुंचाने के लिए उचित पैकेजिंग का महत्वपूर्ण योगदान है। किसानों को पैकेजिंग से जुड़े आवश्यक पहलुओं की जानकारी देते हुए उनकी जिज्ञासाओं का भी समाधान किया गया।
कार्यशाला में कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिक श्री एन.के. सिंह ने सिवनी के सीताफल की विशेषताओं तथा वैज्ञानिक एवं तकनीकी उत्पादन से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी किसानों के साथ साझा की। उन्होंने बेहतर उत्पादन, पौधों की देखभाल और उत्पादन क्षमता बढ़ाने से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर मार्गदर्शन दिया तथा किसानों की जिज्ञासाओं का समाधान किया।
निर्यात की संभावनाओं और योजनाओं की दी जानकारी
कार्यशाला में एपीडा के श्री निशांत बंसोड ने सिवनी जम्बो सीताफल के लिए निर्यात की संभावनाओं तथा विभागीय योजनाओं की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने किसानों को निर्यात के लिए आवश्यक प्रक्रियाओं, पंजीयन एवं अन्य आवश्यकताओं के साथ उपलब्ध विभागीय सहयोग और योजनाओं से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि गुणवत्तापूर्ण उत्पादन, उचित पैकेजिंग और निर्धारित मानकों का पालन करते हुए सीताफल को देश के बड़े बाजारों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने की संभावनाएं हैं।
श्री बंसोड ने किसानों को निर्यात की दिशा में आगे बढ़ने के लिए आवश्यक प्रक्रियाओं को समझाते हुए उपलब्ध अवसरों का लाभ लेने के संबंध में मार्गदर्शन दिया। इससे किसानों को यह समझने में मदद मिली कि स्थानीय स्तर पर उत्पादित सीताफल को बेहतर ढंग से तैयार कर व्यापक बाजार तक कैसे पहुंचाया जा सकता है।
कार्यशाला के माध्यम से किसानों को सीताफल के उत्पादन से आगे बढ़कर प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, बेहतर पैकेजिंग, सुरक्षित भंडारण, संगठित विपणन और निर्यात की दिशा में आगे बढ़ने के अवसरों की जानकारी मिली। ‘सीताफल से समृद्धि’ अभियान के तहत जिला प्रशासन द्वारा किसानों, विभागों, विशेषज्ञों, उद्यमियों एवं निवेशकों के बीच समन्वय स्थापित करते हुए सिवनी जम्बो सीताफल को व्यापक बाजार से जोड़ने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को कार्यशाला ने आगे बढ़ाया। कार्यशाला में सीईओ जिला पंचायत श्रीमती अंजली शाह, सहायक संचालक उद्यानिकी श्रीमती आशा उपंवशी सहित अन्य विभागीय अधिकारियों की सहभागिता रही।


