कोरोना काल में लगा लॉकडाउन छोटे कारोबारियों के लिए बड़ी आर्थिक चुनौती लेकर आया। सीधी नगर पालिका के वार्ड क्रमांक 06 निवासी रामजी जायसवाल भी इससे प्रभावित हुए। रामजी पिछले करीब 30 वर्षों से मानस भवन के सामने ठेले पर पान की दुकान संचालित कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। लॉकडाउन के दौरान दुकान पूरी तरह बंद हो गई। आमदनी का साधन बंद होने के साथ ही परिवार की जरूरतें पूरी करने में उनकी जमा पूंजी भी खर्च हो गई।

लॉकडाउन समाप्त होने के बाद रामजी अपनी दुकान दोबारा शुरू करना चाहते थे, लेकिन आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वे व्यवसाय के लिए जरूरी पूंजी जुटा सकें। इसी दौरान उन्हें प्रधानमंत्री स्वनिधि स्ट्रीट वेंडर योजना की जानकारी मिली। उन्होंने योजना के तहत अपना पंजीयन कराया और भारतीय स्टेट बैंक, गायत्री कॉम्प्लेक्स शाखा से 10 हजार रुपए का ब्याज मुक्त ऋण प्राप्त किया।

ऋण की राशि से रामजी ने अपनी बंद पड़ी दुकान फिर शुरू की। उन्होंने समय पर ऋण की किस्तें जमा कर ऋण चुका दिया। इसके बाद उन्हें 20 हजार रुपए का ऋण मिला, जिसे भी उन्होंने समय पर चुकाया। बेहतर ऋण वापसी के बाद उन्होंने 50 हजार रुपए का ऋण लिया और उसकी किस्तों का भी नियमित रूप से भुगतान किया।

रामजी बताते हैं कि कोरोना काल में उन्होंने नहीं सोचा था कि उनकी दुकान फिर से शुरू हो पाएगी। पीएम स्वनिधि योजना से मिले सहयोग ने उन्हें दोबारा स्वरोजगार से जुड़ने और परिवार की आजीविका को संभालने का अवसर दिया।

रामजी को सरकारी राशन योजना के साथ प्रधानमंत्री आवास योजना और आयुष्मान कार्ड का लाभ भी मिल रहा है। वे योजना से मिले सहयोग के लिए प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हैं।