मुरैना के जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र में बुधवार को श्रवणबाधित दिव्यांगजनों, उनके अभिभावकों और अन्य प्रतिभागियों ने सांकेतिक भाषा में रोजमर्रा के संवाद के तरीके समझे। अंतरराष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में सामान्य शब्दों और वाक्यों के संकेतों का व्यावहारिक प्रदर्शन भी किया गया।
कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ के निर्देश पर हुए इस कार्यक्रम का शुभारंभ संयुक्त कलेक्टर एवं उपसंचालक राजेश कुमार सिन्हा ने किया। आयोजन का उद्देश्य सांकेतिक भाषा का उपयोग करने वाले दिव्यांगजनों के प्रति सामाजिक समझ बढ़ाना और शिक्षा, पुनर्वास, संचार व सहभागिता में समान अवसरों के प्रति जागरूक करना था।
खास बातें
- सामान्य शब्दों और वाक्यों के संकेतों का प्रदर्शन हुआ
- शिक्षा, संवाद, अधिकार और पुनर्वास सेवाओं पर जानकारी दी गई
- पात्र दिव्यांगजनों से केंद्र की सेवाओं से जुड़ने का आह्वान
दैनिक संवाद से अधिकारों तक चर्चा
कार्यक्रम में बताया गया कि सांकेतिक भाषा श्रवणबाधित व्यक्तियों के लिए संवाद और अभिव्यक्ति का प्रमुख माध्यम है। प्रतिभागियों को दैनिक जीवन में इसके उपयोग, शिक्षा एवं पुनर्वास सेवाओं तक पहुंच और दिव्यांगजनों के अधिकारों से जुड़ी जानकारी दी गई।
केंद्र के विशेषज्ञों ने समझाया कि परिवार और समाज के लोग सांकेतिक भाषा को जानें तो श्रवणबाधित व्यक्तियों को सेवाओं और सामाजिक गतिविधियों से जोड़ना आसान होता है। इससे उन्हें अपनी बात प्रभावी ढंग से रखने में सहायता मिलती है और आत्मविश्वास भी बढ़ता है।
केंद्र की पुनर्वास सेवाओं की जानकारी
आयोजन में सांकेतिक भाषा प्रदर्शन, जागरूकता गतिविधियां और संवाद सत्र रखे गए। इसमें केंद्र के अधिकारी-कर्मचारी, दिव्यांगजन, उनके अभिभावक और अन्य उपस्थित लोग शामिल हुए।
समापन पर जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र की ओर से श्रवणबाधित दिव्यांगजनों के लिए उपलब्ध विभिन्न पुनर्वास सेवाओं के बारे में बताया गया। पात्र दिव्यांगजनों और उनके परिवारों से इन सेवाओं से जुड़ने का आह्वान किया गया।




