सेवा संकल्प अभियान अंतर्गत “कहानी बदलाव की” में झाबुआ निवासी श्री गोतम गामड़ की स्वरोजगार की यात्रा इस बात का उदाहरण है कि शासन की योजनाओं का लाभ और सही मार्गदर्शन मिलने पर व्यक्ति अपने अनुभव और कौशल को आजीविका के स्थायी साधन में बदल सकता है। कभी स्वयं वाहन चालक के रूप में रोजगार करने वाले श्री गामड़ आज अपनी जीप-टैक्सी के मालिक हैं और प्रतिमाह लगभग 45 हजार रुपये की आय अर्जित करने के साथ एक अन्य व्यक्ति को भी चालक के रूप में रोजगार दे रहे हैं।

पॉलिटेक्निक कॉलेज के गेट के सामने, झाबुआ निवासी श्री गोतम गामड़ स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद परिवार के साथ परम्परागत कृषि कार्य से जुड़े थे। इसके साथ ही उन्होंने वाहन चालक के रूप में भी कार्य किया। वाहन चलाने का अनुभव होने के कारण उनके मन में स्वयं की जीप-टैक्सी खरीदकर स्वरोजगार स्थापित करने की इच्छा थी, लेकिन वाहन खरीदने के लिए आवश्यक पूंजी की व्यवस्था उनके लिए बड़ी चुनौती थी।

इसी दौरान श्री गामड़ को मध्यप्रदेश आदिवासी वित्त एवं विकास निगम द्वारा संचालित भगवान बिरसा मुण्डा स्वरोजगार योजना की जानकारी मिली। उन्होंने जिला स्तर पर मध्यप्रदेश आदिवासी वित्त एवं विकास निगम, झाबुआ से संपर्क किया। यहां अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा उन्हें योजना, पात्रता एवं ऋण प्रक्रिया के संबंध में आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया गया।

मध्यप्रदेश आदिवासी वित्त एवं विकास निगम झाबुआ के प्रभारी श्री दिनेश श्रीवास द्वारा आवश्यक दस्तावेजों की जांच के उपरांत भगवान बिरसा मुण्डा स्वरोजगार योजना के तहत उनका ऋण प्रकरण एमपी ऑनलाइन के माध्यम से सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, झाबुआ को प्रेषित किया गया। बैंक द्वारा प्रकरण का परीक्षण कर 18.75 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत किया गया।

ऋण राशि प्राप्त होने के बाद श्री गोतम गामड़ ने स्वयं की जीप खरीदी और उसे शासकीय कार्यालय की सेवा में लगाया। स्वरोजगार की इस पहल से आज उन्हें प्रतिमाह लगभग 45 हजार रुपये की आय प्राप्त हो रही है। इतना ही नहीं, उन्होंने अपने वाहन के संचालन के लिए एक अन्य व्यक्ति को चालक के रूप में रोजगार भी उपलब्ध कराया है। इस प्रकार योजना ने न केवल श्री गामड़ को आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया, बल्कि उनके माध्यम से एक अन्य व्यक्ति के लिए भी रोजगार का साधन तैयार हुआ।

श्री गोतम गामड़ बताते हैं कि पहले उन्हें स्वयं रोजगार के लिए प्रयास करना पड़ता था, लेकिन आज स्वयं का व्यवसाय स्थापित होने से परिवार को नियमित आय का आधार मिला है। वे अपनी इस उपलब्धि का श्रेय भगवान बिरसा मुण्डा स्वरोजगार योजना तथा मध्यप्रदेश आदिवासी वित्त एवं विकास निगम से मिले सहयोग और मार्गदर्शन को देते हैं।

अपनी सफलता से उत्साहित श्री गामड़ युवाओं को संदेश देते हैं कि वे अपने हुनर और रुचि को पहचानकर स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ें तथा शासन द्वारा संचालित स्वरोजगार योजनाओं का लाभ लें। दृढ़ संकल्प और निरंतर प्रयास से स्वरोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।