खेतों में मेहनत करने वाले किसानों के लिए पानी की हर बूंद अनमोल होती है। जब यही पानी आधुनिक तकनीक के माध्यम से फसलों की जड़ों तक सही मात्रा में पहुंचता है, तो खेती की लागत कम होने के साथ उत्पादन और आय में भी वृद्धि का रास्ता खुलता है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के माध्यम से ड्रिप सिंचाई का लाभ लेकर बुरहानपुर जिले के किसान किरण पाटील ने खेती में ऐसे ही बदलाव का अनुभव किया है। किरण पाटील बताते हैं कि उनका परिवार खेती-किसानी करते आ रहे है। वे पहले कपास, मक्का और सोयाबीन जैसी फसलों की खेती पारंपरिक तरीके से करते थे। ड्रिप सिंचाई की सुविधा नहीं होने के कारण खेती में पानी, खाद-दवा और मजदूरी पर अधिक खर्च होता था। आय कम होने से परिवार के पालन-पोषण में भी काफी कठिनाई आती थी।
योजना की जानकारी मिली, तो बदली खेती की राह
कृषक किरण बताते हैं कि फील्ड भ्रमण के दौरान, उद्यानिकी विभाग के अधिकारी खेत पर पहुंचे और उन्हें ड्रिप सिंचाई के माध्यम से केला एवं तरबूज जैसी फसलों की खेती करने की सलाह दी। साथ ही, ड्रिप सिंचाई पर शासन की ओर से मिलने वाले अनुदान की जानकारी भी दी गई। योजना की जानकारी से प्रेरित होकर हितग्राही ने उद्यानिकी विभाग के माध्यम से आवेदन किया। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत उन्हें 1 हेक्टेयर क्षेत्र में ड्रिप सिंचाई संयंत्र स्थापित करने के लिए 61 हजार से अधिक रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ। इस सहयोग से उनके खेत में ड्रिप सिंचाई की सुविधा स्थापित हुई और खेती का तरीका भी बदलने लगा।
कृषक किरण अपने अनुभव साझा करते हुए बताते हैं कि ड्रिप संयंत्र के माध्यम से उन्होंने एक हेक्टेयर में तरबूज की फसल लगाई। लगभग तीन महीने में उन्हें 500 क्विंटल तरबूज का उत्पादन प्राप्त हुआ, जिसे उन्होंने 1000/- प्रति क्विंटल के मान से विक्रय किया। अब वे ड्रिप सिंचाई के माध्यम से केला, तरबूज और हल्दी जैसी फसलों की खेती भी कर रहे हैं।
पानी की बचत के साथ ही बढ़ा मुनाफा
हितग्राही किरण कहते हैं कि प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना से मिले ड्रिप संयंत्र ने उनकी खेती को आसान बनाया है। ड्रिप सिंचाई के उपयोग से पानी की बचत, खाद की बचत और मजदूरी की बचत हुई है। साथ ही उत्पादन में भी वृद्धि हुई है। आज वे ड्रिप संयंत्र के माध्यम से खेतों में सिंचाई कर रहे हैं। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना का लाभ मिलने से लाभार्थी किरण को खेती में नई तकनीक अपनाने का अवसर मिला। उद्यानिकी विभाग द्वारा योजना का लाभ दिलाने में मिले सहयोग से उन्हें खेती को बेहतर तरीके से करने में सहायता मिली है।



